भारत एक परमाणु देश – अटल बिहारी वाजपेयी

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भारत एक परमाणु देश – अटल बिहारी वाजपेयी ,16 अगस्त 2018 स्वतंत्रता दिवस के एक दिन बाद अटल जी का निधन हुआ । पोखरण में परमाणु परिक्षण करने वाले और भारत को परमाणु देश बनाने में अटल जी ने अहम् भूमिका निभाई। कारगिल युद्ध में देश के हिट में अहम् फैशला और पाकिस्तान के साथ बस सेवा प्रारम्भ इन्ही की कार्यकाल में हुवा । आइये और कुछ रोचक तथ्य जाने हमारे महान नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के बारे में ।

25 दिसम्बर 2014 को राष्ट्रपति कार्यालय में अटल बिहारी वाजपेयी जी को भारत का सर्वोच्च पुरस्कार “भारत रत्न” दिया गया। उन्हें सम्मान देते हुए भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी खुद 27 मार्च 2015 को उनके घर में उन्हें वह पुरस्कार देने गये थे। उनका जन्मदिन 25 दिसम्बर “गुड गवर्नेंस डे” के रूप में मनाया जाता है।

भारत एक परमाणु देश – अटल बिहारी वाजपेयी !  जन्‍म से लेकर परमाणु परीक्षण और कारगिल वॉर तक

 

  • अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 ई० को भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित ग्वालियर के शिंदे की छावनी में हुआ था।
  • 19 फ़रवरी 1999 कोपाकिस्तानसे अच्छे संबंधों में सुधार की पहल करतें हुए सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस की सेवा शुरू की गई।
  • इनके पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में ही अध्यापन कार्य करते थे। अटलजी के दादा पं० श्याम लाल बिहारी वाजपेयी जाने-माने संस्कृत के विद्वान थे।
  • अटल बिहारी वाजपेयी का देश के राजनीतिक पटल पर एक ऐसे विशाल व्यक्तित्व वाले राजनेता के रूप में
  • सम्मान किया जाता है, जिनकी व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता है और जिन्होंने तमाम अवरोधों को तोड़ते हुए 90 के दशक में राजनीति के मुख्य मंच पर बीजेपी को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • अटलजी की आरंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई। तत्पश्चात ग्वालियर में ही विक्टोरिया कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
  • 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया।
  • इन्होंने कानपुर के डी.ए.वी. कॉलेज से राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर की उपाधि अर्जित की। इसके पश्चात कानून की पढ़ाई करने के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।
  • हैरानी की बात है कि अटल बिजारी वाजपेयी ने लॉ की पढ़ाई अपने पिता के साथ-साथ की। कानून के छात्र के रूप में वे दोनों एक साथ होस्टल के कमरे में रहते थे।
  • अपनी वाणी के ओज और ठोस फैसले लेने के लिए विख्यात वाजपेयी को भारत-पाकिस्तान मतभेदों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का श्रेय दिया जाता है। अपने इन ठोस कदमों के साथ वह बीजेपी के ‘राष्ट्रवादी राजनीतिक एजेंडे’ से परे जाकर एक व्यापक फलक के राजनेता के रूप में जाने जाते हैं।
  • बीजेपी के चार दशक तक विपक्ष में रहने के बाद वाजपेयी 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने लेकिन संख्या बल में मात खाने से उनकी सरकार महज 13 दिन ही चल सकी। 1998 में आंकड़ों ने एक बार फिर वाजपेयी के साथ लुकाछिपी का खेल खेला और स्थिर बहुमत नहीं होने के कारण 13 महीने बाद 1999 की शुरुआत में उनके नेतृत्व वाली दूसरी सरकार भी गिर गई।
  • स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना
  • कावेरी जल विवाद को सुलझाया, जो 100 साल से भी ज्यादा पुराना विवाद था।
  • संरचनात्मक ढाँचे के लिये बड़ा कार्यदल, विद्युतीकरण में प्रगति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, आदि का गठन किया।
  • देश के सभी हवाई अड्डों एवं राष्ट्रीय राजमार्गोंका विकास किया; कोकण रेलवे तथा नई टेलीकॉम नीति की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने जैसे कदम उठाये।
  • आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, भी गठित कीं। जिस वजह से काफी जल्दी काम होने लगे।
  • अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त करके आवास निर्माण को प्रोत्साहन दिया।
  • उन्होंने बीमा योजना की भी शुरवात की जिस वजह से ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगोंको (NRI) काफी फायदा हुआ।
  • 1951 में अटल जी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य के रूप में चुने गए।
  • 1968 से 1973 तक वो भारतीय जन संघ के अध्यक्ष रहे। विपक्षी पार्टियों के अपने दूसरे साथियों की तरह उन्हें भी आपातकाल के दौरान जेल भेजा गया।
  • 1977 में जनता पार्टी सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो इसे अपने जीवन का अब तक का सबसे अच्छा पल बताते हैं।
  • 1980 में वो बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे. 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे।
  • अटल बिहारी वाजपेयी अब तक नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं।
  • 1962 से 1967 और 1986 में वो राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
  • 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। उनकी यह सरकार महज 13 दिन ही चली।
  • इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे।
  • 1998 के आमचुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने लेकिन AIDMK  द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस ले लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.
  • 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया । गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली ।
  • अटलजी की इस सरकार ने अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया और इस माध्यम से उन्होंने देश में गठबंधन की राजनीति को नया आयाम दिया। इन 5 सालों में राजग सरकार ने गरीबों, किसानों और युवाओं के लिए अनेक योजनाएं लागू कीं।
  • अटल सरकार ने भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत की और दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया।  2004 में देश में लोकसभा चुनाव हुआ और भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में शाइनिंग इंडिया का नारा देकर चुनाव लड़ा।
  • इन चुनावों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र की सरकार बनायी और भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा।
  • इसके बाद लगातार अस्वस्थ रहने के कारण अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। अटल जी ने भारतीय राजनीति का आयाम स्थापित किया है। जो कि हमेशा याद किया जाएगा …
  • अटल जी को देश-विदेश में अब तक अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
  • अटल जी ने विवाह नहीं किया। उन्होंने अपना जीवन देश की भलाई के लिए एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प कर लिया था।
  • अटलजी अपने प्रारंभिक जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आ गए थे। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में इन्होने भी भाग लिया और 24 दिन तक कारावास में रहे।
  • इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट ख्याति प्राप्त की।
  • अटलजी ने अनेक पुस्तकों की रचना की। उनको कविताओं से भी खासा लगाव रहा। वह अपने विचारों को कई बार कविताओं के माध्यम से ही सामने रखते थे।
  • अटलजी एक कुशल वक्ता हैं। उनके बोलने का ढंग बिलकुल निराला है।
  • पत्रकारिता से अटलजी ने राजनीति में प्रवेश किया। 6 अप्रैल 1980 ई० में उनको भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर आसीन किया गया।
  • मई 1996 को अटलजी ने देश के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। किन्तु इस बार इनको संख्या बल के आगे त्याग-पत्र देना पड़ा।
  • मार्च 1998 को पुनः अटलजी को देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। 13 अक्टूबर 1999 को अटलजी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
  • इससे पहले 1997 में वह जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बने और संयुक्‍त राष्ट्र संघ के एक सत्र में उन्होंने हिंदी में अपना भाषण दिया।
  • यह बात सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के दिग्गज नेता थे, लेकिन विरोधी दलों के बीच भी उनका अपना खास मुकाम रहा।
  • यहाँ तक कि जवाहर लाल नेहरू ने भविष्यवाणी करते हुए कह दिया था कि एक दिन अटल जी भारत के प्रधानमंत्री होंगे।
  • दिसंबर 2005 में वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान किया।
  • अटल बिहारी वाजपेयी को उनके करीबी दोस्त और रिश्तेदार ‘बापजी’ कहते हैं।
  • उनकी गोद ली हुई एक बेटी है, जिसका नाम नमिता है।
  • अटलजी मात्र राजनेता ही नहीं अपितु सर्वमान्य व्यक्ति एवं साहित्यकार भी हैं। उनका चिरप्रसन्न एवं मुक्त स्वभाव उनको महान बना देता है।
  • आज अटलजी राजनीति के उस सर्वोच्च स्थान पर पहुँच चुके हैं जहाँ व्यक्ति को किसी भी राजनीतिक पक्ष की जरूरत नहीं पड़ती। अपितु उनका सान्निध्य ही किसी भी पक्ष अथवा व्यक्ति के लिए गौरव की बात होती है।
  • उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. 4 भाई और तीन बहनों में वह परिवार के सबसे छोटे और प्रिय बेटे थे. आपातकाल का पुरजोर विरोध किया और जेल भी गए, पिता के साथ की कानून की पढ़ाई. 1942 से शुरू की राजनैतिक जीवन की शुरुआत. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में हुए शामिल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ आमरण अनशन पर बैठे. लोकसभा में 9 बार और राज्य सभा में दो बार चुने गए, संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिंदी में दिया भाषण.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत अहम् फैसले लिए. अटल बिहारी वाजपेयी का एमस में निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ. अटल बिहारी वाजयपेयी का निधन स्वतंत्रता दिवस के एक दिन बाद अटल बिहारी वाजपेयी का एमस में निधन हुआ. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी. अटल बिहारी वाजपेयी श्रद्धांजलि पूरा देश ने मिलकर दिया. अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते वक़्त भारत और विदेश के बहुत सरे लोग मौजूद थे, अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं अटल बिहारी वाजपेयी श्रद्धांजलि देते वक़्त सरे न्यूज़ चैनेलो में प्रसारित किया जा रहा था. पोरखरण परमाणु परीक्षण अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में ही हुआ था. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पोखरण परमाणु परीक्षण करके भारत को पुरे देश में प्रख्यात किये. भारत के पूर्व प्रधान मंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता थे ,. अटल बिहारी वाजपेयी अन्य राजनीतिक दलों के नेता के बीच संबंध बहुत मजबूत थे जिससे अटल बिहारी वाजपेयी हमेसा समाचार की सुर्ख़ियों में रहते थे

भारत एक परमाणु देश – अटल बिहारी वाजपेयी ,16 अगस्त 2018 स्वतंत्रता दिवस के एक दिन बाद अटल जी का निधन हुआ ।पोखरण में परमाणु परिक्षण करने वाले पहले प्रधानमंत्री.

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